शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

महात्मा गांधी


ऐसे अदुभुत सेनानी थे,
        जो रण में खुद लड़ पड़ते थे। 
देते थे उपदेश जो हमको, 
        उसमें  आगे बड़ते थे।
दिया स्वराज अहिंसा से,  
        इतिहास बदलते चले गए।
उड़ा आजादी का झण्डा, 
            बाबू बड़ते चले गए।









1 टिप्पणी:

  1. खुद सोचिये कि आज गाँधी के रस्ते पर चल कर कौनसा काम हो सकता है .... हा गाँधी के सहारे (नोटों के सहारे ) सब हो सकता है ..
    जनाब दुनिया में …कम से कम भारत में तो सत्य और अहिंसा नहीं बची है ….. और रही बात गाँधी की तो गाँधी सिर्फ नोट पर ही रह गया है ….

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