शनिवार, 7 जनवरी 2012


केन्द्र में कांग्रेस और उसकी सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस खुलकर आमने सामने आ गए हैं। ऐसा कोई पहली बार नही जब तृणमूल सुप्रीमों और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को मुश्किल में डाला है। लगभग हर बड़े मुददे में ममता बनर्जी ने कांग्रेस की मुश्किल बड़ाई है। तेल बड़ाने के दाम पर ममता बनर्जी के सामने सरकार को झुकना पड़ा। कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर ममता बनर्जी का असहयोग सरकार की किरकिरी का कारण बना। पेंशन बिल पर कांग्रेस बीजेपी को मनाने में कामायाब हो गई मगर ममता की हट ने उसके कदम थाम दिए। सबसे मुश्किल तो तब आई जब ममता ने लोकपाल में लोकसभा में साथ दिया मगर राज्य सभा में वो मुकर गई। नया मामला सामने आया है इंदिरा भवन का नाम बदलने को लेकर। इस मुददे के चलते कांग्रेस और तृणमूल के बीच आरोप प्रत्यारोप जोरों पर है। कांग्रेस ने जहां तृणमूल को वामदल और बीजेपी की बी टीम बता दिया वहीं तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस को सरकार से बाहर निकालते तक की चेतावनी डे डाली। बंग्लादेश में प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल में आखिरी समय से बाहर रहने का फैसला लेकर प्रधानमंत्री की किरकिरी की। बहरहाल जानकार इस तल्खी के कई मायने निकाल रहे है। देखना दिलचस्प होगा की यूपी चुनाव के बाद केन्द्र में भी बदलाव होता है।


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