बुधवार, 27 मार्च 2013

अन्याय तंत्र

देश में संजय दत्त की सजा माफ कराने के लिए क्या नेता क्या जज क्या बुद्धिजीवी हर कोई एक सुर में बोल रहा है। मगर इस महान भारत के महान बुद्धिजीवियों को क्या यह नही मालूम की इस देश में 79 फीसदी जेल में कैदी अन्डरट्रायल है। इन्हें भी इंसाफ की दरकार है खासकर वह जो मामूली गुनाहकरने पर जेल डाल दिए गए। क्या इनके साथ बेइंसाफी हम नही कर रहे हैं? यह अपने जुर्म की अधिकतमसजा काट चुके है मगर हमारी न्यायप्रणाली की न्याय मिलने की लंबी प्रक्रिया ने इन्हें जेल में ही रखा है।क्या यह इनके मानवाधिकारों का उल्लंघन नही? आज देश की जेलों में उसकी क्षमता से कई ज्यादा कैदी है बंद हैं।वहां की हालत देख लें तो मन सिहर उठेगा। जेल में होने वाली बर्बर मौतें आए दिन अखबारों की सूखिर्या बनती हैं। क्या श्रीमान मार्केडेय काटजू और श्री दिग्विजय सिंह जी इनके लिए भी अपील करेंगे? दरअसल हम सभी को इसे एक मुहिम की तरह लेना चाहिए ताकि जो अपने जुर्म की सजा काट चुका हो उसे हमारी उबाऊ न्यायप्रक्रिया के चलते जेल में एक में दिन भी दिन ज्यादा नही काटना पड़े। संजय दत्त को कदापि माफी नही मिलनी चाहिए? यह न्याय का अपमान होगा।

1 टिप्पणी:

  1. सटीक अभिब्यक्ति ...'संजय दत्त' के 'पश्याताप' के वावजूद 'न्याय' सभी के लिए समान होना चाहिए, अन्यथा एक गलत प्रथा जन्म ले लेगी.

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