शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

भ्रष्ट पीडीएस


खामियों से भरी है सार्वजनिक वितरण प्रणाली
सर्वोच्च न्यायालय की समिति ने उजागार किया भ्रष्टाचार
देश के पीडीएस हालातों की जांच के लिए बनी थी समिति
2006 में गठित हुई वाधवा समिति
वाधवा समिति ने पहले चरण में की दिल्ली में पीडीएस की जांच
अगस्त, 2007 में वाधवा समिति ने सौंपी दिल्ली क्षेत्र की रिपोर्ट
समिति ने किया 6 राज्यों का दौरा
बदहाली के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया
पीडीएस प्रणाली की 5 लाख दुकानें
दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा वितरण नेटवर्क
 खाद्य सब्सिडी पर हर साल होता है  28,000 करोड़ का खर्च
पिछले चार साल में खाद्य सब्सिडी हो गई दोगुनी
पिछले साल राशनकार्ड बनाने के लिए डेढ़ करोड़ गरीब परिवारों को देनी पड़ी घूस
67 फ़ीसदी कार्डधारकों को पीडीएस से नहीं मिलता राशन
एनएसएसओ रिपोर्ट के मुताबिक 0.01 हेक्टेअर जोत वाले आधे किसानों को नही मिला राशनकार्ड
2006 से जनवरी 2010 तक 171 लाख बोगस राशन कार्ड निरस्त किए गए
2009 में 24 करोड़ परिवारों के पास था राशनकार्ड
2009 में 13 करोड़ परिवारों को मिला एपीएल राशनकार्ड
योजना आयोग के मुताबिक गरीबों तक एक रुपए की मदद पहुंचाने पर खर्च होते है 3.65 रुपए
57 फ़ीसदी रियायती अनाज नहीं मिला पाता गरीबों को
23 फ़ीसदी सस्ते दर की दुकानों करती है सही काम
सस्ते दर की दुकानों का फायदा बहुत कम
घाटे के कारण रियायती अनाज को बेचा जाता है खुले बाजार में ।

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