सोमवार, 28 नवंबर 2011

कृषि उत्पादन

बढ़ती आबादी की मांग को देखते हुए इस देश को दूसरी हरित क्रांति की जरूरत है। प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह खुद कई मंचों से इसकी पैरवी कर चुके है। खाद्यान्न के रिकार्ड तोड़ उत्पादन के बावजूद कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत है। हालांकि भारत सरकार ने 11वी पंचवर्षिय योजना में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय हाल्टीकल्चर मिशन जैसे कार्यक्रमों की शुरूआत हुई। इसका लक्ष्य कृषि क्षेत्र में 4 फीसदी विकास दर हासिल करना था। बहरहाल इसके 3 फीसदी रहने का अनुमान है। खाद्यान्न उत्पादन 241 मिलियन टन है मगर  2020 तक इसे बढ़ाकर 280 मिलियन टन करने की चुनौति है। इसके लिए जरूरी है कि किसान को नई तकनीक और जनकारियों से लैस किया जाए। साथ ही समय से बीज, उवर्रक, सस्ता ऋण और सिंचाई की व्यवस्था की दुरूस्त जैसे करने कदम जरूरी है। हमारे देश में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता विकसित देशों के मुकाबले एक तिहाई कम है। आंकड़ों के लिहाज से खाद्यान्न उत्पादन की दर  1997 से 2007 तक महज 1 फीसदी रही। न सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए बल्कि किसान को उसकी उपज का लाभाकारी मूल्य दिया जाए। बजट 2011-12 में सरकार ने कृषि  क्षेत्र के लिए कई नए कार्यक्रम की घोषणाऐं की है। इनमें प्रमुख है पूर्वी क्षेत्र में हरित क्रांति लाना, 60 हजार दलहन ग्रामों का एकीक्रत विकास, आयल पाम का संवर्धन, सब्जी समूह संबंधी कार्यक्रम, पोशक अनाज कार्यक्रम, राष्ट्रीय प्रोटीन सम्पूरण मिशन, त्वरित चारा विकास कार्यक्रम आदि। देखना होगा की महंगाई की रफतार थामने और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में यह कदम कितने महत्वपूर्ण साबित होंगे।





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