मंगलवार, 29 अक्तूबर 2013

बम फटेंगे! लोग मरेंगे! नेताओं का क्या जाता है भाई!

पटना में हुए सिलसिलेवार धमाके खूफियां एजेंसियों की नाकामी और राज्य पुलिस की लचर व्यवस्था का परिणाम है। आतंकवाद से निपटने के लिए प्रतिबद्धता का जो घोर अभाव हमारे देश में है उसको देखते हुए अगर आने वाले दिनों में  भी आतंकी अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे पाते है तो हैरानी नही। क्योंकि नेताओं को राजनीति करने से फुरसत कहां है।देश की आइबी का काम सरकारों की लिए चुनावी सर्वे करना है विरोधियों को साधने के लिए साधन तलाशना है। यही काम राज्यों में एलआइयू करती है। नेता लड़ेगे लड़ते रहेंगे? निर्दोष मरते रहेंगे? सरकारें एलर्ट मिला या नही इसपर राजनीति करेंगे? राज्य एनसीटीसी बनने नहीं देंगे? मुंबई में आतंकी हमलों के बाद जब चिदंबरम ने गृहमंत्रालय संभाला था तो बदलाव की कोशिशें जरूरी होती दिखाई दी। पुलिस आधुनिकरण पर देश चर्चा करने लगा। मगर आज हम उसी दोराहे पर खड़े है। ब्लास्ट होने पर बिना वक्त गवाऐं, निंदा करो। टीवी में दिखो। ब्लास्ट की इंटेंसिटी बताओं। अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ो। नेताओं का क्या जाता है। इनके घर का चिराग थोड़ी न बुझा। हे ईश्वर, इन सबसे आखिर कब बाज़ आऐंगे हमारे नेता?।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें