सोमवार, 13 जनवरी 2014

कजरीवाल के कथन

1-किसी से न समर्थन लेंगे न देंगे!
कांग्रेस के समर्थन से सरकार चल रही है।
2-सरकारी आवास नही लेंगे!
बड़ा बंग्ले पर हल्ला हुआ तो छोटे बंग्ले की तलाश चल रही है।
3-कोई भी मंत्री सरकारी गाड़ी नही लेगा!
लाल बत्ती नही ली मगर वीआइपी नम्बर की सरकारी गाड़ी से चल रहें हैं।
4-सुरक्षा नही लेंगे!
केजरीवाल की सुरक्षा में कई गुना खर्चा आ रहा है।
5-15 दिन में जनलोकपाल पारित करेंगे!
जनलोकपाल पर समिति कर रही है विचार।
6-हर सप्ताह जनता दरबार लगाऐंगे!
अब जनता दरबार से तौबा। शिकायत दर्ज कराने के लिए दूसरे तरीकों का सहारा लिया जाएगा।
7-सारे पानी के मीटर बदले जाऐंगे!
वही पुराने मीटर लगाए जा रहे हैं।
8-सबको 700 लीटर तक मुफत पानी!
केवल पानी उनको जिनके पास मीटर है। 1 जनवरी से पानी के 10 फीसदी दाम बढ़े।
9-बिजली के बिलों में 50 फीसदी तक की कटौति!
400 यूनिट उपभोग करने वालों को दी जा रही है सब्सिडी।
10-बिजली वितरण कंपनियों का सीएजी से आडिट!
सीएजी को इसके लिए कह दिया गया है।
11-विदेशी किराना स्टोर को न!
इसका आदेश जारी कर दिया गया है।
12-सत्ता में आते ही भ्रष्टाचारियों के जेल भेजेंगे!
भ्रष्टाचार के सबूत जनता जुटाएगी।
13-शीला और उसके मंत्रियों की जांच कराऐंगे!
सरकार शीला के दल के समर्थन पर टिकी है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. वतन पर कफन(राश्ट्र-कवि श्री अषोक चक्रधर जी को समर्पित गीत)

    ऐ मेरे अहले चमन, ऐ मेरे कौमी कफन
    इस तरह से तू ना अपने प्यार का इजहार कर
    सरहदो के हर षहीदो के लिये मुमकिन तो है
    पर वतन के लूटने वालो का ना श्रृंगार कर
    अस्मिता मेरे वतन की क्यों धरा मे है दफन
    ऐ मेरे अहले चमन, ऐ मेरे कौमी कफन


    राम के और कृश्ण के उपदेष को सबने सुना
    बुद्व और महावीर का हर वाकिया सबनेे गुना
    गुरूग्र!थ के ईसा के लब्जोंको भी गीता म!े पढा
    र्दुभाग्य है इस देष मे! क्योंबनगया मजहब धडा
    मीरा कबीरा के भजन से हो गया था गुल चमन
    ऐ मेरे अहले चमन, ऐ मेरे कौमी कफन

    जो मजहब औेर जातियों में बांटते हैं ये धरा
    हिंदू,मुष्लिम ,सिक्ख ,ईसाइ के बने हैं रहनुमा
    खुद लिपट कर खादियों में वादियों में मस्त है!
    मेरे वतन की आबरु ,बे-आबरु में अस्त है
    देवताओं की धरा को आज हम करते दमन
    ऐ मेरे अहले चमन, ऐ मेरे कौमी कफन

    आड़ मंे तेरी सियासी लूटकर सब खा गये
    मुल्क के , मजहब लूटेरे सल्तनत मंे छा गये
    हर तरह की भ्रश्टता अब राजनीति हो गयी
    व्यभिचार से तेरी तिरंगे अस्मिता भी खो गयी
    कौन करता है तूझे इस देष मंे दिल से नमन
    ऐ मेरे अहले चमन, ऐ मेरे कौमी कफन

    नाम लेकर राश्ट्र का ,उत्थान की बाते! करे
    मजहबी फिरकापरस्ती मे!, लडे़ कटकर मरे
    आधार लेकर जनमतो! का ,ये छलावा हो रहा है
    अस्मिता अपनी पुरानी , देष मेरा खो रहा है
    झेलते हो क्यो! सियासी ,आग की ऐसी तपन
    ऐ मेरे अहले चमन, ऐ मेरे कौमी कफन

    स्वर्णपक्षी था कभी यह देष ,क्यों बेहाल है
    मरघटों की राजनीति क्यों यंहा महाकाल है
    बगुले दरि!दों से यंहा पर हंस बनकर घूमते
    रोंदते हैं क्यों धरा , मद के नषे में झूमते
    हो रहा है राश्ट्र के सम्मान का कैसा हवन
    ऐ मेरे अहले चमन, ऐ मेरे कौमी कफन।।

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  2. भारत के भाण्ड(रमेष भट्ट जी की टिप्पणी पर)
    सारे पागल राजनीति के चोराहो! पर भो!क रहे है!
    हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई धडे़सभी के चै!क रहे है!
    जाति,पाति की दाल मुलायम,माया मिलकर छो!क रहे है!
    अपनी ताकत, राहुल, मोदी, आप पार्टी झो!क रहे हेै!

    ना कोई चिन्तन,ना कोई मन्थन,षब्दो!मे!दोशारोपण हेै
    दिषा हीन इस जनमत का ये प्रारब्ध कैसा पोशण हेै
    आप की टोपी,बाप की टोपी,बी.जे.पी.सन्ताप की टोपी
    गा!धी,नेहरू,खाप की टोपी,हिन्दू,मुस्लिम जाप की टोपी

    खानदानी षिक्षक का बेटा,भीख बोट की मा!ग रहा है
    मा!सरस्वति को लक्ष्मी की खू!टी पर क्या!े टा!ग रहा हेै
    जोर-जोर से चिल्लाता है, म!चो! पर कविता गाता है
    षब्द - भेद का ये जादूगर, क!गला है या सहजादा है

    राश्ट्र सुरक्षित कैसे होगा,भाशण मे! कोइ बात नही हेेै
    म!हगाई, भुखमरी ,गरीबी की क्या कोइ औकात नही है
    म!हगे - म!हगे, होटल, बॅगले, अय्यासी मे! रहने वाले
    कालेधन और स्वाभिमान के अ!गले-क!गले हमने पाले

    राश्ट्र सुरक्षा की गारन्टी , हम सब इनमे! ढू!ढ रहे है!
    ये नव्वे भी बिना धार के हथियारो! से मू!ड रहे है!
    भेड़,बकरिया ! भीड़ जुटा कर मु!डवाने को आजाती है!
    यही कारण है प्रजातन्त्र को नष्ल भेडियो! की खाती है

    हिन्दू भेडे़,मुस्लिम भेडे़, सिक्ख, इसाई, नेडे़- नेडे़
    ब्राह्मण, ठाकुर, वैष्य, षूद्र सब कट जाते है! टेडे़-मेडे़
    हर म!चो पर खटिक, कसाई,षमषीर षब्द की टा!ग रहे है!
    जनमत की इस वध -षाला से भीख बोट की मा!ग रहे है!

    मेरे बोट की, बकरो! , मुर्गो से ज्यादा औेकात नही है
    हम षदियो! से कटते आये ये घातक, आघात नही है
    राहुल काटे, मोदी काटे, आप पार्टी, बा!टी बाटे
    कवि ‘आग’ कहता है जनमत,नेताओ! की मिलकर चाटे!!
    राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
    ऋशिकेष
    मो09897399815

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