सोमवार, 30 दिसंबर 2013

झारखंड की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?

झारखंड में मोदी ने लंबी चैड़ा भाषण दिया। लोगों से पूछा कि इतनी बड़ी खनजि संपदा के बावजूद यह राज्य
इतना पिछडा़ हुआ क्यों है? जवाब जनता से नही आया। मोदी के के मुखारबिन्दु से ही निकला। बीजेपी झारखंड में नही है। मगर मोदी जी यह भूल गए की बीते तेरह सालों में में साढ़े 8 साल में झारखंड में  बीजेपी ने राज किया ऐसे में बीजेपी अपनी जवाबदेही से कैसे बच सकती है। हर बात के लिए कांग्रेस के मथ्थे ठीकरा फोड़ना कितना उचित है? आखिर क्यों नही नरेन्द्र मोदी ने यह माना की बीजेपी से भी चूक हुई है। बीजेपी सरकार, शिबू सोरेन की सरकार या फिर निर्दलीय मधुकोड़ा की सरकार ने बस एक ही काम किया। झारखंड की लूट खसूट। मधुकोड़ा सबसे पहले बाबू लालू मरांडी सरकार मंे पंचायती राज मंत्री बनें। 2005 में बीजेपी ने इन्हे टिकट देने  से मना कर दिया तो कोड़ा जगन्नाथपुर से निर्दलीय जीत कर आए। मगर बीजेपी की सरकार ने इनसे समर्थन लेने में जरा भी देरी नही की। इसके बदले इन्हें खनिज भूगर्भिय और सहकारिता मंत्रालय दिया गया। बाद में मधुकोड़ा समेत दूसरे समर्थकों ने बीजेपी की सरकार गिरा दी। 14 सितंबर 2006 को कांग्रेस ने निर्दलीय मधुकोड़ा को मुख्यमंत्री बना दिया। उसके बाद मधुकोड़ा ने कांग्रेस के सरंक्षण में 23 महिने जमकर लूट घसूट मचाई। मगर झारखंड तबाह होता रहा। जहां कोयले और लौह अयस्क की खदानें है वहां बड़ी आबादी अंधरे में जी रही है।जहां इतनी बड़ी खरिज संपदा है वहां 69 लाख परिवारों में से 35 लाख परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहें हैं। 24 जिलों में से 19 नक्सलप्रभावित जिले हैं। यानि सरकार एक बड़ा हिस्सा कानून व्यवस्था पर खर्च करती है। इसके अलावा शिशु मुत्यु दर 41 फीसदी, मातृ मृत्यु दर प्रति लाख 261, टीकाकरण 64 फसदी, और साक्षरता दर 67.6 फीसदी जो राष्टीय औसत से बहुत नीचे हैं। 30 फीसदी क्षेत्रफल जंगल से घिरा हुआ है।प्रति व्यक्ति आय 30719 और देश की विकास दर में इस राज्य की भागीदारी 1.72 फीसदी है। झारखंड की आर्थिक हालात इतनी खराब हैं कि राज्य पर 34869 करोड़ का कर्ज है। उच्च शिक्षा में जीईआर 7.5 फीसदी है यानि 100 में से 7 लोग ही उच्च शिक्षा में दाखिला ले पातें हैं। 26 फीसदी आबादी आदिवासी समुदाय से है। केवल 7 फीसदी ग्रामीण आबादी के पास पाइप के जरिये पानी पहुंचता है। अस्पलात में प्रसव कराने का दर 45 फीसदी है। यानि सामाजिक सूचक इतने खराब है की शर्म आ जाए। बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। गरीबी बड़े पैमाने पर है। कुषि क्षेत्र बहुत सीमित है। बुनियादी ढांचे के निर्माण में बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा लागत आती है। कुल मिलाकर इन तेरह साल के झारखंड के सफरनामें को देखें तो राज्य में सिर्फ और सिर्फ खुली लूट होती रही। इसके लिए क्षेत्रीय पार्टिया जितनी जिम्मेदार रही उससे कही ज्यादा जिम्मेदारी बीजेपी और कांग्रेस की है। 

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